नई दिल्ली:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आज देश की नई पीढ़ी यानी Gen-Z और Gen-Alpha को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। युवाओं के नेतृत्व में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन में बोलते हुए संघ प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि अगर युवा अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें 'देश-विरोधी' करार देना सरासर गलत है। वे हमारी अपनी अगली पीढ़ी हैं और उनकी जायज चिंताओं को सुनना व हल करना हमारी जिम्मेदारी है।
"आज की पीढ़ी पिछली पीढ़ियों से कहीं अधिक ईमानदार"
मोहन भागवत ने आज के युवाओं की सोच और कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा:
"नई पीढ़ी (Gen-Z और Gen-Alpha) हमारी पिछली पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा ईमानदार, तार्किक और संवेदनशील है। उन पर सच्ची देशभक्ति और निस्वार्थ सेवा का बहुत गहरा असर होता है। वे आँख बंद करके किसी की बात नहीं मानते, बल्कि हर बात के पीछे तर्क और स्पष्टता चाहते हैं।"
उन्होंने कहा कि जब हमारी पीढ़ी युवा थी, तब हम बड़ों की बातों पर सवाल नहीं उठाते थे। लेकिन आज के युवा सवाल पूछते हैं और उन्हें लोकतंत्र के दायरे में रहकर प्यार और तर्कसंगत जवाब मिलना ही चाहिए।
संवाद ही लोकतंत्र की असली ताकत: 'डिबेट नहीं, शास्त्रार्थ की परंपरा'
लोकतंत्र में विरोध के महत्व को रेखांकित करते हुए संघ प्रमुख ने भारतीय परंपरा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति में जिसे 'डिबेट' (Debate) कहा जाता है, हमारी संस्कृति में उसे 'शास्त्रार्थ' माना गया है।
आम सहमति का माध्यम: विरोध और चर्चा लोकतंत्र में सहमति बनाने का जरिया हैं।
सत्य के कई पहलू: जब अलग-अलग और विरोधी विचार सामने आते हैं, तभी हमें किसी मुद्दे या सच्चाई की पूरी तस्वीर दिखाई देती है।
सिस्टम में सुधार के लिए आंदोलन: युवाओं का आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ न होकर व्यवस्था (System) में सुधार लाने के लिए होना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की वकालत
देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर बोलते हुए मोहन भागवत ने स्वीकार किया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ सुधारे जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं का आक्रोश या विरोध इस बात का संकेत है कि उनकी आवश्यकताएं और समस्याएं मौजूदा ढांचे से पूरी नहीं हो पा रही हैं।
उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों का स्मरण कराते हुए युवाओं से अपील की कि विरोध जताने के तरीके हमेशा संवैधानिक, शांतिपूर्ण और देश को जोड़ने वाले होने चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करने वाले।
इस बयान के 4 मुख्य बिंदु (Key Takeaways):
युवा देश-विरोधी नहीं: विरोध दर्ज कराना हक है, इससे युवाओं की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
संवाद से समाधान: युवाओं से सीधे बातचीत करके हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी: देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की तुरंत आवश्यकता है।
संवैधानिक दायरा जरूरी: आंदोलन का मकसद व्यवस्था को सुधारना होना चाहिए, न कि अराजकता या बंटवारा फैलाना।





