ऋषिकेश / देहरादून:

उत्तराखंड में लगातार हो रही मुसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। धर्मनगरी ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के करीब पहुंचते हुए चेतावनी निशान को पार कर गया है। गंगा के रौद्र रूप को देखते हुए तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया है, वहीं मुनिकीरेती से लेकर त्रिवेणी घाट तक पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

​ऋषिकेश में बिगड़े हालात: 339.70 मीटर पहुंचा जलस्तर

​पहाड़ों पर लगातार जारी बारिश से गंगा की सहायक नदियां उफान पर हैं, जिससे ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़कर 339.70 मीटर पहुंच गया है। बता दें कि यहाँ चेतावनी का निशान 339.50 मीटर निर्धारित है। जलस्तर बढ़ने के कारण स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और त्रिवेणी घाट समेत कई प्रमुख घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। प्रशासन ने घाटों की ओर जाने पर रोक लगा दी है और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है।

​मुख्य सचिव ने ली आपात बैठक, दिए 'जीरो कैजुअल्टी' के निर्देश

​प्रदेश में बिगड़ते मौसम और आपदा के खतरे को देखते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर स्थिति की गहन समीक्षा की। उन्होंने सभी प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन टीमों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के आदेश दिए हैं।

​समीक्षा बैठक के मुख्य निर्देश:

​सड़कों की बहाली: भूस्खलन की वजह से बंद हुई सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत खोला जाए और संवेदनशील रास्तों पर जेसीबी व भारी मशीनरी पहले से तैनात रहे।

​जल निकासी व्यवस्था: निचले और जलभराव वाले इलाकों में पंपों की मदद से पानी की तुरंत निकासी सुनिश्चित की जाए।

​ज़रूरी सेवाएं बहाल: बिजली, पेयजल और संचार व्यवस्था में आए व्यवधान को युद्धस्तर पर ठीक किया जाए।

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​"अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे हर अलर्ट"

​मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन में समयबद्ध सूचना ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने निर्देश दिया कि मौसम विभाग की चेतावनियां और अलर्ट राज्य स्तर से लेकर जनपद, ब्लॉक, तहसील और ग्राम स्तर तक बिना किसी देरी के प्रसारित हों, ताकि दूर-दराज के गांव में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक समय पर जानकारी पहुँच सके।

​वर्तमान में सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में स्थिति पर कड़ी नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित राहत-बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।