पटना (डेस्क):
बिहार की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने सबको हैरान कर दिया है। 'जन सुराज' पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस मजबूत किले में ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
करीब 31 सालों से जिस सीट पर बीजेपी का कब्जा माना जाता था, वहां प्रशांत किशोर ने बड़े अंतर से चुनाव जीतकर सभी पुरानी राजनीतिक धारणाओं को तोड़ दिया है।
इस जीत के साथ ही बिहार में आरजेडी और बीजेपी-जेडीयू के अलावा 'तीसरे विकल्प' की चर्चा भी बहुत तेज हो गई है।
19 हजार से ज्यादा वोटों से दी करारी शिकस्त
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और अंत में 19,324 वोटों के बड़े अंतर से शानदार जीत दर्ज की।
जानिए किसको मिले कितने वोट:
• प्रशांत किशोर (जन सुराज): 64,151 वोट (विजेता)
• नीरज सिन्हा (बीजेपी): 44,827 वोट (दूसरे स्थान पर)
• रेखा गुप्ता (आरजेडी): 14,273 वोट (तीसरे स्थान पर)
इन आंकड़ों से साफ है कि जनता ने इस बार पारंपरिक पार्टियों को छोड़कर जन सुराज पर अपना भरोसा जताया है। आरजेडी उम्मीदवार की जमानत तक बच पाना मुश्किल हो गया और वह तीसरे नंबर पर खिसक गईं।
बीजेपी के गढ़ में PK की बड़ी सेंध
बांकीपुर सीट को लंबे समय से बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। यहां बीजेपी के वोट बैंक को तोड़ना किसी भी विरोधी दल के लिए नामुमकिन माना जाता था। लेकिन प्रशांत किशोर ने अपनी जमीनी रणनीति और 'जन सुराज यात्रा' के दम पर बीजेपी के इस मजबूत वोट बैंक में सीधी सेंध लगा दी।
इस हार ने बीजेपी के अंदरूनी खेमे में भी हड़कंप मचा दिया है और पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
बिहार की सियासत में बदला समीकरण
प्रशांत किशोर की इस ऐतिहासिक जीत ने बिहार की राजनीति के पूरे समीकरण को बदल कर रख दिया है। अब तक बिहार में मुख्य मुकाबला सिर्फ दो गठबंधनों (एनडीए और महागठबंधन) के बीच ही देखा जाता था। लेकिन बांकीपुर के नतीजों ने साबित कर दिया है कि बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है और 'जन सुराज' एक मजबूत विकल्प बनकर उभर चुका है।
आने वाले चुनावों पर पड़ेगा बड़ा असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांकीपुर का यह नतीजा सिर्फ एक उपचुनाव की जीत नहीं है, बल्कि यह आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों का ट्रेलर है। इस जीत से जन सुराज के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर गया है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी और आरजेडी दोनों ही बड़ी पार्टियों के लिए यह एक बड़ा चेतावनी संकेत है।
अब देखना यह होगा कि प्रशांत किशोर की यह ऐतिहासिक जीत बिहार की भावी राजनीति को किस नए मोड़ पर लेकर जाती है!
