डिजिटल डेस्क: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एआई (AI) जनित फर्जी वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया है। आईटी नियमों (IT Rules) में बड़े संशोधन करते हुए सरकार ने एआई कंटेंट की पहचान जाहिर करना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत या सरकार का आदेश मिलने पर गैरकानूनी और भ्रामक सामग्री को हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दी गई है।
इन कठोर नियमों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
1. AI से बनी सामग्री पर 'लेबल' लगाना अब कानूनी मजबूरी
नए दिशानिर्देशों के तहत, कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या क्रिएटर यदि एआई तकनीक का उपयोग करके कोई कंटेंट तैयार करता है, तो उस पर स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा (Metadata) देना अनिवार्य होगा।
पहचान आसान होगी: यूज़र्स को तुरंत पता चल जाएगा कि कंटेंट असली है या कृत्रिम रूप से तैयार किया गया है।
भ्रामक पोस्ट पर नकेल: प्रतिरूपण (Impersonation) और बिना सहमति के बनाई गई अंतरंग तस्वीरों या बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करनी होगी।
2. एक्शन टाइम में बड़ा बदलाव: जानिए नई समयसीमा
सरकार ने टेक कंपनियों के ढुलमूल रवैये को खत्म करने के लिए कार्रवाई के समय को बेहद सीमित कर दिया है:
प्रावधान | पुरानी व्यवस्था | नई सख्त व्यवस्था |
|---|---|---|
एआई कंटेंट की पहचान | स्वैच्छिक/अस्पष्ट | स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा अनिवार्य |
गैरकानूनी सामग्री हटाना | 36 घंटे | घटाकर केवल 3 घंटे |




