देहरादून (विशेष संवाददाता)

​उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही वर्षा के बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 24 घंटों के भीतर राज्य के 12 जिलों में अचानक बाढ़ (Flash Flood) आने का गंभीर अंदेशा जताया है। इस मौसम चेतावनी को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क मोड में आ गए हैं। शासन ने सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और आपातकालीन विभागों को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रहने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

​मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा 'फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन' के मुताबिक, ऊधम सिंह नगर जिला को छोड़कर उत्तराखंड के शेष सभी 12 जिलों के जलसंग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्रों और निचले संवेदनशील इलाकों में कम से मध्यम स्तर का फ्लैश फ्लड आ सकता है।

​किन 12 जिलों पर मंडरा रहा है संकट?

​मौसम विभाग द्वारा चिन्हित किए गए प्रभावित क्षेत्रों में राज्य के अधिकांश प्रमुख जिले शामिल हैं:

* ​गढ़वाल मंडल: देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार।

* ​कुमाऊं मंडल: अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल और पिथौरागढ़।

​इन जिलों के नदी-नालों, गदेरों और पहाड़ी जलधाराओं में अचानक जलस्तर बढ़ने और मिट्टी के पूरी तरह संतृप्त (Saturated Soil) होने के कारण सतही जल का तेज बहाव और भीषण जलभराव (Waterlogging) देखने को मिल सकता है।

​शासन की त्वरित कार्रवाई: आपदा प्रबंधन सचिव ने दिए सख्त निर्देश

​मौसम विभाग के इस बुलेटिन के बाद आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने मोर्चा संभाला और तत्काल प्रभाव से प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों (DMs), पुलिस प्रशासन, फायर ब्रिगेड और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) को मुस्तैद रहने का आदेश दिया है।

​"सभी संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि राहत और बचाव कार्यों से जुड़ी सभी मशीनरी, जैसे जेसीबी (JCB) और आपातकालीन एम्बुलेंस, को संभावित लैंडस्लाइड और संवेदनशील मार्गों पर पहले से तैनात रखा जाए।"

— विनोद कुमार सुमन, आपदा प्रबंधन सचिव

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​मृदा संतृप्ति (Soil Saturation) से बढ़ा भूस्खलन और जलभराव का जोखिम

​विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों से जारी रुक-रुक कर बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों और निचले मैदानों की मिट्टी में नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है।

1. ​मिट्टी का कटाव: अत्यधिक संतृप्त मिट्टी अब और पानी सोखने में असमर्थ है, जिससे थोड़ी सी भी तेज बारिश 'सरफेस रन-ऑफ' (सतही जल का तेज बहाव) पैदा कर रही है।

2. ​भूस्खलन (Landslides): पर्वतीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर पत्थर गिरने और मलबा आने (Shooting Stones) का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

3. ​छोटी नदियों का उफान: पहाड़ों में बहने वाले छोटे-छोटे गदेरे और मौसमी नदियां अचानक रौद्र रूप ले सकती हैं।