बैंकॉक/नोंथबुरी:

थाईलैंड के नोंथबुरी प्रांत से एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार को यहाँ के देबसिरिन नोंथबुरी स्कूल में अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से अफरा-तफरी मच गई। स्कूल के ही एक छात्र ने अंधाधुंध फायरिंग कर अपने शिक्षक और साथी छात्रों को निशाना बनाया। इस दर्दनाक हमले में एक शिक्षक समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर छात्र ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

​क्लास के दौरान अचानक गूंजी गोलियों की आवाज

​यह खूनी वारदात बैंकॉक के उत्तरी इलाके में स्थित बैंग क्रुई जिले के एक प्रसिद्ध माध्यमिक विद्यालय की है, जहाँ लगभग 3,000 छात्र पढ़ते हैं। चश्मदीदों के अनुसार, शुक्रवार को जब पढ़ाई चल रही थी, तभी परिसर में गोलियों की आवाज सुनाई दी।

​राहत एवं बचाव दल 'पोह टेक तुंग फाउंडेशन' ने तुरंत मौके पर पहुंचकर छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घायलों में से एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसे नजदीकी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

​पुलिस और शिक्षा मंत्रालय का बयान

​नोंथबुरी प्रांतीय पुलिस कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल देचरापी कोंगडी ने पुष्टि की है कि हमलावर छात्र ने मौके पर ही खुदकुशी कर ली।

​वही, देश के शिक्षा मंत्री प्रसर्ट जंतारारुआंगटोंग ने मीडिया को बताया:

​"इस दुखद घटना में शिक्षक और छात्रों समेत चार लोगों की जान गई है। सुरक्षा बल और पुलिस अधिकारी घटना के कारणों की जांच में जुटे हैं।"

​थाईलैंड में पैर पसारती 'गन कल्चर'

​यह दुखद घटना एक बार फिर थाईलैंड में बंदूकों की आसान उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दक्षिण पूर्व एशिया में थाईलैंड गन वायलेंस (बंदूक हिंसा) के मामले में बेहद संवेदनशील माना जाता है।

​लाखों आग्नेयास्त्र: आंकड़ों के अनुसार, थाईलैंड में नागरिकों के पास 1 करोड़ से भी अधिक बंदूकें मौजूद हैं।

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​औसत: देश में प्रति 100 लोगों पर औसतन 15 बंदूकें हैं।

​हिंसा का ग्राफ: वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के हेल्थ डेटाबेस के मुताबिक, फिलीपींस के बाद दक्षिण पूर्व एशिया में बंदूक से होने वाली सबसे ज्यादा हत्याएं थाईलैंड में ही दर्ज की जाती हैं।

​फिलहाल, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि नाबालिग छात्र के पास हथियार कहाँ से आया और इस आत्मघाती कदम के पीछे की असल वजह क्या थी। इस घटना के बाद से पूरे देश के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।