डिजिटल डेस्क:
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच का पुराना संघर्ष एक बार फिर बेहद हिंसक रूप ले चुका है। गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने यमन की सरकारी सेना के ठिकानों को निशाना बनाते हुए अब तक का सबसे भयावह हमला बोला। मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन्स से किए गए इस भीषण हमले में कम से कम 38 सैनिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
मिसाइलों और ड्रोन्स से मचाई भारी तबाही
सैन्य सूत्रों के अनुसार, हूतियों ने यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों—मरीब और हदरामौत—में स्थित सरकारी सेना के शिविरों को निशाना बनाया। विद्रोहियों ने एक के बाद एक 8 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और कई आत्मघाती (कामिकेज) ड्रोन्स से हमला किया। विस्फोट इतने जोरदार थे कि पूरे सैन्य शिविर पल भर में मलबे में तब्दील हो गए।
वर्ष 2022 में हुए अनौपचारिक युद्धविराम (Ceasefire) के टूटने के बाद से यह अब तक का सबसे विनाशकारी हमला माना जा रहा है।
मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
शुरुआती रिपोर्टों में 30 सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी, लेकिन गंभीर रूप से घायलों के दम तोड़ने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 38 तक पहुंच गया है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में तलाश जारी है और कई जवानों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ने का अंदेशा है।
अस्पतालों में आपात स्थिति, भारी नुकसान का दावा
हमले में घायल 50 से ज्यादा सैनिकों को नजदीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हमले की तीव्रता को देखते हुए अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है।
दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने यमनी सेना के हथियार डिपो, सैन्य वाहनों और बंकरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
इस घटना के बाद से यमन में एक बार फिर पूर्ण स्तर के गृहयुद्ध का खतरा मंडराने लगा है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

