अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर जल्द से जल्द समझौता करे, अन्यथा उसे भारी सैन्य तबाही का सामना करना पड़ सकता है।

​ट्रंप ने दावा किया कि उनके द्वारा बनाए गए कड़े सैन्य और आर्थिक दबाव के कारण ही ईरान बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। उन्होंने कहा कि हालिया कठोर फैसलों के बाद अब तेहरान के मन में अमेरिका को लेकर 'सम्मान' की भावना आई है।

​वार्ता विफल हुई तो 'कुचल' देंगे: ट्रंप

​अत्यधिक आक्रामक लहजे के बावजूद ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता कोई युद्ध नहीं, बल्कि राजनयिक रास्ता है। उन्होंने कहा:

​"मैं शांतिपूर्ण समझौता करना पसंद करूंगा, क्योंकि मेरी मंशा मासूम लोगों की जान लेने की नहीं है। लेकिन अगर बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका ईरान को बुरी तरह से कुचलने में संकोच नहीं करेगा।"

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​मुख्य बातें (Key Highlights)

​परमाणु हथियारों पर नो-कॉम्प्रोमाइज: ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

​शांति और कूटनीति पहला विकल्प: अमेरिकी प्रशासन बातचीत के जरिए मसले का हल निकालने के लिए तैयार है, ताकि मानवीय नुकसान से बचा जा सके।

​कड़े सैन्य कदम उठाने की चेतावनी: समझौता न होने या बातचीत विफल रहने की स्थिति में वाशिंगटन पूरी ताकत से सैन्य कार्रवाई करेगा।