Srisailam suicide case ने पूरे आंध्र प्रदेश समेत देश को हिलाकर रख दिया है। प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर के लिए विख्यात धार्मिक नगरी श्रीशैलम के एक रेस्ट हाउस में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ही परिवार के पाँच सदस्यों ने सामूहिक रूप से फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। मृतकों में तीन सगी बहनें, उनका भाई और एक 15 साल का नाबालिग भांजा शामिल हैं। कमरे से बदबू आने के बाद जब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तब इस दर्दनाक वारदात का खुलासा हुआ। शुरुआती पुलिस जांच में भीषण आर्थिक तंगी और भारी अवसाद को इस आत्मघाती कदम की मुख्य वजह माना जा रहा है।

​Srisailam Suicide Case: बदबू आने पर टूटा दरवाजा, ऐसे सामने आई खौफनाक सच्चाई

​यह सनसनीखेज घटना श्रीशैलam स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बने 'वडेरा सतारम' (Vadera Satram) नामक एक प्रसिद्ध रेस्ट हाउस में घटित हुई। जानकारी के अनुसार, रेस्ट हाउस के कमरा नंबर 11 से मंगलवार की सुबह अचानक बेहद तीखी और असहनीय दुर्गंध आने लगी। कर्मचारियों ने जब दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई आवाज या हरकत नहीं हुई। अंदर की कुंडी पूरी तरह से बंद थी।

​अनहोनी की आशंका को देखते हुए रेस्ट हाउस प्रबंधन ने तत्काल स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब भारी मशक्कत के बाद कमरे का मुख्य दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का खौफनाक मंजर देखकर पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए। मुख्य कमरे में दो पुरुष सीलिंग फैन से लटके हुए थे, जबकि बाथरूम के भीतर तीनों महिलाओं के शव फंदे पर झूल रहे थे।

​Srisailam Suicide Case में मृतकों की पूरी पहचान

​आत्मकुर के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रामंजनेयुलु ने तुरंत पुलिस बल और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ घटनास्थल का दौरा किया। कमरे से मिले दस्तावेजों और प्राथमिक जांच के आधार पर मृतकों की पहचान की गई:

​पल्लापु सुधाकर (उम्र 50 वर्ष) – परिवार का मुखिया और भाई

​मल्लेश्वरी (उम्र 45 वर्ष) – बड़ी बहन

​गोगुला आदिलक्ष्मी (उम्र 36 वर्ष) – मंझली बहन

​श्रीदेवी (उम्र 33 वर्ष) – सबसे छोटी बहन

​मणिकंठा (उम्र 15 वर्ष) – मल्लेश्वरी का नाबालिग बेटा (भांजा)

​पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पीड़ित परिवार मूल रूप से आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले के बत्तलापल्ली मंडल का रहने वाला था।

​एक महीने से कमरा नंबर 11 में ठहरा हुआ था परिवार

​DSP रामंजनेयुलु ने मीडिया को बताया कि यह परिवार बीते महीने 28 जुलाई को एक ऑटो-रिक्शा किराए पर लेकर श्रीशैलम पहुंचा था। उन्होंने वडेरा सतारम में कमरा नंबर 11 लिया था, जिसका दैनिक किराया मात्र ₹29 था। परिवार पिछले करीब 28 दिनों से लगातार इसी कमरे में रुका हुआ था और बाहर बहुत कम निकलता था।

​जब रेस्ट हाउस के कर्मचारियों ने पिछले दिनों उनसे कमरा खाली करने का अनुरोध किया, तो सुधाकर और उनकी बहनों ने कर्मचारियों से कुछ दिन और रुकने की मोहलत मांगी थी। उन्होंने प्रबंधन को बताया था कि परिवार के सदस्यों की तबीयत ठीक नहीं है और वे मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में विशेष मन्नत पूरी करने और पूजा-अर्चना के बाद ही अपने गांव लौटेंगे।

​3 दिन पहले ही सामूहिक आत्महत्या की आशंका

​फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस के अनुसार, शवों की विकृत स्थिति और बदबू को देखते हुए यह साफ जाहिर होता है कि परिवार ने कम से कम तीन दिन पहले ही फांसी लगा ली थी। कमरा अंदर से पूरी तरह पैक था और खिड़कियां भी बंद थीं, जिसके कारण कई दिनों तक किसी को भी इस घटना की भनक नहीं लग सकी। जब शवों से तेज दुर्गंध बाहर आने लगी, तब जाकर पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।

​गरीबी, कर्ज और पारिवारिक संकट बना मौत का कारण

​स्थानीय पुलिस द्वारा की गई पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि परिवार लंबे समय से असहनीय आर्थिक संकट से जूझ रहा था। सुधाकर ने जीवन भर शादी नहीं की थी और वह अपनी तीनों बहनों और भांजे की जिम्मेदारी अकेले ही संभाल रहा था।

​तीनों बहनों में से दो बहनें पहले से तलाकशुदा थीं और पारिवारिक अलगाव के बाद सुधाकर के साथ ही रह रही थीं। घर में आय का कोई नियमित स्रोत नहीं था और लगातार बढ़ता हुआ कर्ज परिवार के लिए भारी मानसिक तनाव का कारण बन चुका था। आर्थिक तंगी और भविष्य के अंधकार से तंग आकर पूरे परिवार ने एक साथ अपनी जीवनलीला समाप्त करने का भयानक निर्णय लिया।

​पुलिस की अग्रिम कार्रवाई और पोस्टमार्टम

​पुलिस ने सभी पांचों शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए श्रीशैलम के सरकारी अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और कमरे की तलाशी ली जा रही है ताकि किसी संभावित सुसाइड नोट या पत्र की बरामदगी हो सके। स्थानीय पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और बत्तलापल्ली में रहने वाले उनके अन्य परिजनों व रिश्तेदारों से संपर्क साधा जा रहा है।

​मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (Helpline Assistance):

​यदि आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति गंभीर मानसिक तनाव, अवसाद या किसी संकट का सामना कर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें और सहायता लें। भारत सरकार की राष्ट्रीय टेली-मानस सेवा चौबीसों घंटे मुफ्त उपलब्ध है:

​Tele-MANAS टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800-891-4416 / 14416

​आधिकारिक पोर्टल: https://telemanas.mohfw.gov.in

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