​देश भर के खुदरा बाजारों में आम उपभोक्ताओं की जेब पर एक बार फिर भारी दबाव पड़ने वाला है। onion price hike की आशंका गहराने लगी है क्योंकि सरकारी खरीद एजेंसियों के पास मौजूद बफर स्टॉक का करीब 30% प्याज सड़ने और अंकुरित होने के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। देश के प्रमुख थोक बाजारों में प्याज की गुणवत्ता प्रभावित होने और नई खरीफ फसल की रोपाई में हुई भारी देरी के चलते आने वाले त्योहारों के मौसम में कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया जा सकता है।

​मौजूदा समय में राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े महानगरों में प्याज के दाम 50 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं। सप्लाई चैन में आई इस अचानक रुकावट और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत बाजार में हस्तक्षेप करते हुए महाराष्ट्र के लासलगांव से दिल्ली के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' नाम की स्पेशल मालगाड़ी रवाना की है।

​onion price hike का मुख्य कारण: 30% बफर स्टॉक हुआ खराब

​नेपाल और भारत के बड़े थोक बाजारों को सप्लाई करने वाले नासिक बेल्ट में इस साल हुई बेमौसम बारिश ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कटाई के दौरान हुई बारिश की वजह से प्याज में नमी का स्तर बढ़ गया, जिससे इसकी शेल्फ-लाइफ (रखे रहने की क्षमता) काफी घट गई।

​अमूमन हर साल भंडारण के दौरान लगभग 20% प्याज खराब होता है, लेकिन इस बार अंकुरण और सड़न की वजह से यह नुकसान 30% को पार कर गया है। आशंका जताई जा रही है कि सीजन के अंत तक यह आंकड़ा 40% तक जा सकता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने चालू सीजन में 2 लाख टन प्याज बफर स्टॉक के लिए खरीदने का लक्ष्य रखा था, हालांकि, NAFED और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) मिलकर केवल 1.20 लाख टन प्याज ही जुटा सके।

​कांदा एक्सप्रेस और onion price hike को रोकने के सरकारी प्रयास

​बाजार में सप्लाई सुचारू करने और कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रेल और सड़क परिवहन दोनों का एक साथ सहारा लिया है।

​रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, लासलगांव से लगभग 500 टन प्याज लेकर 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेन दिल्ली के आजादपुर मंडी के लिए रवाना हो चुकी है। सड़क मार्ग के जरिए भी आपूर्ति तेज की गई है, जिसमें NAFED ने मंगलवार रात 30 टन और NCCF ने बुधवार शाम 30 टन प्याज की खेप ट्रकों के माध्यम से दिल्ली भेजी है। सरकार की योजना आने वाले दिनों में कोलकाता, चेन्नई, गुवाहाटी और मदुरै जैसे बड़े खपत वाले शहरों के लिए भी ऐसी ही स्पेशल प्याज ट्रेनें चलाने की है।

​केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने घोषणा की है कि रेल मार्ग से लाई जा रही प्याज को दिल्ली में NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर जनता को बेचा जाएगा।

​खरीफ फसल में देरी से onion price hike का जोखिम बढ़ा

​आगामी महीनों में प्याज संकट गहराने की सबसे बड़ी वजह मानसून की शुरुआती बेरुखी है। कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में प्याज के सबसे बड़े उत्पादक जिले नासिक में खरीफ सीजन की रोपाई लगभग ठप पड़ गई थी। नासिक जिले में खरीफ प्याज का औसत रकबा लगभग 30,000 हेक्टेयर रहता है, लेकिन इस बार समय पर बारिश न होने के कारण महज 370 हेक्टेयर में ही रोपाई हो पाई है, जो कि कुल लक्ष्य का केवल 1 प्रतिशत है।

​सामान्य तौर पर इस अवधि तक आधी रोपाई पूरी हो जाती है। इस भारी देरी के कारण खरीफ की नई फसल जो आमतौर पर अक्टूबर में बाजार में आ जाती थी, अब नवंबर के मध्य या दिसंबर की शुरुआत तक ही मंडियों में पहुंचेगी। इसके अलावा, नासिक के किसानों और व्यापारियों के पास मौजूद कुल 24 लाख टन स्टोरेज क्षमता में से अब सिर्फ 25% स्टॉक ही शेष बचा है। ऐसे में सितंबर और अक्टूबर के दौरान जब तक नई फसल नहीं आती, तब तक बाजार पूरी तरह से मार्च-अप्रैल की पुरानी गर्मियों वाली फसल पर निर्भर रहेगा।

​आगामी महीनों में बाजार पर असर

​व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों की मानें तो यदि बफर स्टॉक और किसानों के पास बचा हुआ प्याज इसी तेजी से खराब होता रहा, तो फेस्टिव सीजन के दौरान खुदरा बाजार में भारी किल्लत हो सकती है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'कांदा एक्सप्रेस' जैसे अभियानों से दिल्ली-एनसीआर को तात्कालिक राहत जरूर मिलेगी, लेकिन दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों तक सप्लाई सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। आने वाले पांच महीने भारतीय रसोई के बजट और बाजार में उपलब्धता के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं।