पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान संपन्न हुई। पश्चिम एशिया में उपजे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी समुद्री नाकेबंदी की परिस्थितियों के बीच दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की आधिकारिक बैठक है।
इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों ने रणनीतिक संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह के संचालन और मध्य पूर्व में शांति बहाली से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात: किन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रही बातचीत?
पश्चिम एशिया के मौजूदा सुरक्षा संकट को देखते हुए इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई थीं। बैठक के दौरान निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श हुआ:
होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री व्यापार की सुरक्षा: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में तनाव और संभावित नाकेबंदी से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित और निर्बाध रखने पर बल दिया, ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।
चाबहार पोर्ट और आईएनएसटीसी प्रोजेक्ट: चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के बीच रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार है। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा: पश्चिम एशिया के विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों और समुद्री जहाजों पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुद्दा प्रधानमंत्री मोदी ने प्रमुखता से उठाया।
संवाद और कूटनीति पर जोर: भारत ने अपना रुख दोहराते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान युद्ध के बजाय केवल कूटनीति और शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए ही संभव है।
ईरान का रुख: 'हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे'
बिश्केक में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात से ठीक पहले, ईरानी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को संबोधित करते हुए क्षेत्र में स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया।
मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी स्थिति में युद्ध का विस्तार नहीं चाहता है, लेकिन यदि देश की अखंडता या संप्रभुता पर कोई आक्रामकता होती है, तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सभी पड़ोसी और सहयोगी देशों के आर्थिक हितों के लिए अनिवार्य है।
एससीओ सम्मेलन में पीएम मोदी की अन्य प्रमुख द्विपक्षीय बैठकें
किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में हिस्सा ले रहे अन्य वैश्विक नेताओं के साथ भी उच्च स्तरीय चर्चा की।
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से मुलाकात
पीएम मोदी ने आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के साथ भी एक द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी अपने विचार साझा किए।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रस्तावित बैठक
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