​तिरुवनंतपुरम:

दक्षिण भारत के तटीय राज्य केरल में इस समय कुदरत का भीषण कहर देखने को मिल रहा है। मूसलाधार बारिश और उससे उपजी बाढ़ की विभीषिका ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।

बारिश जनित विभिन्न दुर्घटनाओं में अब तक 15 मासूम जिंदगियों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि 7 लोग अभी भी गहरे संकट के बीच लापता बताए जा रहे हैं। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव अभियानों में अहर्निश जुटी हुई हैं।

​बेघर हुए हजारों लोग, राहत शिविर बने एकमात्र सहारा

​विकराल होती बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सैकड़ों राहत शिविरों की स्थापना की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह तक राज्य भर में कुल 316 राहत शिविर संचालित किए जा रहे थे।

इन शिविरों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण विस्थापित हुए लगभग 11,018 से अधिक प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया गया है। शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल और बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

​किस जिले में कितनी जनहानि? (प्रभावित क्षेत्रों का ब्योरा)

​राज्य में बारिश के प्रकोप से जनहानि का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है:

• ​कोट्टायम: यहाँ कुल 3 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जिनमें पूंजर क्षेत्र के दो निवासी और पानी की टंकी में दुर्घटनावश गिरे एक मासूम बालक का नाम शामिल है।

• ​मलप्पुरम: इस जिले में प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा 4 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

• ​एनार्कुलम व कोल्लम: इन दोनों जिलों से 2-2 मौतों की दुखद खबर आई है।

• ​कन्नूर, कोझिकोड, इडुक्की और मुवत्तुपुझा: इन क्षेत्रों में 1-1 व्यक्ति की बारिश से जुड़ी घटनाओं में मृत्यु दर्ज की गई है।

​लापता लोगों की स्थिति:

कोल्लम और कन्नूर जिलों से 2-2 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि मलप्पुरम, इडुक्की और मुवत्तुपुझा से 1-1 व्यक्ति का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राहत और बचाव दल लगातार उनकी खोज में जुटे हैं।

​अन्नदाताओं पर दोहरी मार: हजारों एकड़ फसल जलमग्न

​इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने केरल के कृषि क्षेत्र को भी गहरा आघात पहुँचाया है। प्रारंभिक आकलन रिपोर्ट के अनुसार:

• ​लगभग 165 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है।

• ​आपदा की सीधी मार 3,596 से अधिक किसानों पर पड़ी है, जिनकी मेहनत पानी में बह गई है।

​प्रशासन का मानना है कि विस्तृत सर्वेक्षण और जलस्तर घटने के बाद नुकसान का अंतिम आंकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है।

​राज्य सरकार का बड़ा फैसला: सहायता राशि और मुआवजे का निर्देश

​आपदा प्रबंधन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के उपरांत राज्य सरकार ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:

1. ​अंतिम संस्कार हेतु सहायता: बारिश जनित घटनाओं में मारे गए मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए ₹10,000 की तत्काल अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया गया है।

2.कृषि मुआवजे में संशोधन: कृषि विभाग को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को हुए नुकसान का पारदर्शी मूल्यांकन कर मुआवजे के प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन प्रस्तुत करें, ताकि अन्नदाताओं को उचित राहत मिल सके।

​मोर्चे पर NDRF और भारतीय सेना: हाई अलर्ट पर सुरक्षा बल

​आपदा की गंभीरता को देखते हुए पथानामथिट्टा, कोट्टायम और इडुक्की जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की कई टुकड़ियां तैनात की गई हैं।

• ​अतिरिक्त बल की मांग: हालात से निपटने के लिए अराक्कोनम से NDRF की दो अतिरिक्त टीमों को बैकअप के तौर पर बुलाया गया है।

• ​हवाई व रक्षा सहायता: अत्यंत दुर्गम एवं बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं।

• ​सेना व सुरक्षा बल तैनात: आपात स्थिति से निपटने के लिए अलाप्पुझा में ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) तथा कन्नूर और वायनाड के रणनीतिक इलाकों में डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स (DSC) के जवानों को मुस्तैद रहने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

​उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद प्रशासन का दावा है कि राज्य के सभी जिलों में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय हैं।

​मौसम विभाग का रेड/ऑरेंज अलर्ट: तटीय इलाकों में मंडराया खतरा

​भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के लिए नई चेतावनी जारी करते हुए आगामी दिनों में भी भारी से अति-भारी बारिश का अनुमान जताया है।

​मौसम विभाग की मुख्य चेतावनी:

▪ ​तेज हवाओं का प्रकोप: राज्य में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है।

▪ ​मछुआरों को सख्त हिदायत: केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप के तटीय इलाकों में समुद्र के भीतर 60 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और स्थिति अत्यंत भयावह रहने के आसार हैं। अतः मछुआरों को समुद्र में न जाने की कड़ी चेतावनी दी गई है।

▪ ​ऊंची लहरों का जोखिम:इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) के अनुसार, उत्तरी केरल के समुद्र तटों पर 2.7 से 3.5 मीटर ऊंची खतरनाक लहरें उठ सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

​राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जलभराव वाले स्थानों या नदी-नालों के करीब न जाएं और प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।