नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (Anti-Corruption Branch - ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर आवंटन में कथित धांधली और करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी के मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने दिल्ली के पूर्व जल संसाधन मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन समेत कुल छह लोगों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) और निजी कंपनियों के प्रमोटर भी शामिल हैं।

​गिरफ्तार आरोपियों की सूची

​भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR No. 10/2024) के तहत जिन छह लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनमें शामिल हैं:

​सत्येंद्र जैन: पूर्व जल संसाधन मंत्री, दिल्ली सरकार

​उदित प्रकाश राय: तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), दिल्ली जल बोर्ड (IAS अधिकारी)

​अंकित श्रीवास्तव: पूर्व संविदा सलाहकार (Contractual Consultant), डीजेबी

​नागेंद्र यादव: प्रोपराइटर, एएन एंटरप्राइजेज

​राजा कुमार कुर्रा: मालिक, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड

​पंकज वर्मा: प्रोपराइटर, सृजनहार

​मामले की पृष्ठभूमि और टेंडर में धांधली के आरोप

​यह पूरा मामला दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय (Directorate of Vigilance) की एक औपचारिक शिकायत से जुड़ा है, जिसके आधार पर एसीबी ने मई 2024 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

​जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दिल्ली जल बोर्ड के विभिन्न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) के आधुनिकीकरण, उन्नयन और क्षमता विस्तार के लिए जारी किए गए टेंडरों में नियमों की अनदेखी की गई थी।

​प्रतिस्पर्धा सीमित करना: टेंडर की तकनीकी शर्तों में इस प्रकार हेरफेर किया गया जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई और केवल एक विशेष तकनीक प्रदाता कंपनी को सीधा लाभ पहुँचाया जा सके।

​पायलट अध्ययन की अनदेखी: परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले अनिवार्य रूप से किया जाने वाला 'पायलट अध्ययन' नहीं कराया गया।

​शर्तों में फेरबदल: सीवेज शोधन के लिए आवश्यक मानक मापदंडों को जानबूझकर तकनीकी शर्तों से बाहर रखा गया और प्रतिबंधात्मक क्लॉज जोड़े गए।

​डिजिटल साक्ष्य और मिलीभगत का खुलासा

​एसीबी की तकनीकी टीम द्वारा जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल डेटा के विश्लेषण में यह सामने आया कि निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क था।

​टेंडर जारी होने से पहले ही उसकी आधिकारिक शर्तों, शुद्धिपत्रों (Corrigendum) और तकनीकी ड्राफ्ट्स को निजी पक्षों के साथ साझा किया गया। निजी कंपनियों के सुझावों के अनुसार सरकारी फाइलों में संशोधन किए गए, जिन्हें बाद में वास्तविक टेंडर का हिस्सा बनाया गया।

​वित्तीय लेन-देन और 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत का रूट

​जांच एजेंसी ने वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल के बाद रिश्वत और कमीशन के पैसे के ट्रांसफर के पूरे नेटवर्क का पता लगाया है।

​यूरोटेक एनवायरनमेंट से जुड़ी संस्थाओं से फंड को सबसे पहले एएन एंटरप्राइजेज के खातों में स्थानांतरित किया गया।