UP Sports Policy के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के होनहार एथलीटों के लिए रोजगार और सम्मान के नए दरवाजे खोल दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्राइजमनी पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता के समापन अवसर पर यह घोषणा की कि आगामी एक माह के भीतर 500 और पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने, पारंपरिक अखाड़ों को आधुनिक संसाधन मुहैया कराने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है।
गोरखनाथ मंदिर में आयोजित इस खेल उत्सव के समापन पर मुख्यमंत्री ने न सिर्फ पहलवानों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल को केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि करियर और स्वाभिमान का माध्यम मानती है।
UP Sports Policy के अंतर्गत अब तक 500 से अधिक को मिला सीधा रोजगार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों के चलते अब तक 500 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को विभिन्न सरकारी विभागों में सीधी नियुक्ति दी जा चुकी है। अगले तीस दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश पुलिस सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विभागों में 500 अतिरिक्त खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे।
सरकार की मंशा खिलाड़ियों को उनकी योग्यता और उपलब्धियों के अनुरूप उपयुक्त पद प्रदान करने की है। यही कारण है कि खिलाड़ियों को खेल विभाग में सहायक निदेशक से लेकर यूपी पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) तक के राजपत्रित पदों पर नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का विजन सिर्फ पदक जीतने पर नकद इनाम बांटना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के पूरे जीवन को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना है।
पदक विजेताओं पर इनामों की बारिश: ओलंपिक से एशियाड तक वित्तीय सुरक्षा
अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर तिरंगा लहराने वाले उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन राशि में भारी बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि पदक विजेताओं के लिए वर्तमान में क्या व्यवस्थाएं लागू हैं:
ओलंपिक पदक विजेता: स्वर्ण पदक जीतने पर ₹6 करोड़, रजत पदक पर ₹4 करोड़ और कांस्य पदक जीतने पर ₹2 करोड़ की सम्मान राशि दी जाती है।
ओलंपिक प्रतिभागी: प्रतिभाग करने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को ₹10 लाख की प्रोत्साहन राशि मिलती है।
कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स: इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले राज्य के एथलीटों को ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
यह वित्तीय सहायता खिलाड़ियों को बिना किसी आर्थिक तंगी के अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग लेने और आधुनिक उपकरण जुटाने में मदद करती है।
UP Sports Policy और पारंपरिक अखाड़ों का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने देश की प्राचीन कुश्ती परंपरा को सहेजने वाले अखाड़ों और निजी खेल अकादमियों के योगदान की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने में समाज और निजी संस्थाओं की भूमिका हमेशा से अहम रही है।
इसी क्रम में सरकार ने फैसला लिया है कि:
प्रदेश के सभी पारंपरिक अखाड़ों का आधिकारिक पंजीकरण कराया जाएगा।
अखाड़ों के जीर्णोद्धार, आधुनिक मैटिंग, उच्च स्तरीय ट्रेनिंग किट, अनुभवी कोच और मैनेजर की व्यवस्था के लिए सरकारी वित्तीय अनुदान दिया जाएगा।
जो निजी खेल अकादमियां ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के युवाओं को मंच दे रही हैं, उन्हें भी सरकारी सहायता से जोड़ा जाएगा।
