​चीन में रोबोटैक्सी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दबदबे ने लेबर मार्केट की कमर तोड़ दी है। ड्राइवरलेस कैब से लेकर व्हाइट-कॉलर नौकरियों तक, AI के कारण बेरोजगारी का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है।

​ रोबोटैक्सी की दस्तक से टैक्सी ड्राइवरों की 'आजीविका' पर संकट

​चीन के वुहान शहर में जब ड्राइवरलेस रोबोटैक्सी (Robotaxi) उतारी गई, तो रातों-रात हजारों टैक्सी ड्राइवरों का रोजगार छिन गया। हालांकि, हाल ही में कुछ तकनीकी खराबी और सड़कों पर ट्रैफिक जाम की वजह से इन रोबोटैक्सी की जांच शुरू हुई और फ्लीट को हटाना पड़ा, जिससे ड्राइवरों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।

​लेकिन यह राहत अस्थाई है—AI का यह एप्लीकेशन अब पूरे देश में ड्राइवरों की रोजी-रोटी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।

​ सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, दफ्तरों में भी 'सफेदपोश' नौकरियों पर मंडराया खतरा

​बात सिर्फ सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों तक सीमित नहीं है। दफ्तरों में बैठकर काम करने वाले 'व्हाइट-कॉलर' (White-collar) कर्मचारियों की जगह भी अब AI तेजी से ले रहा है। कॉर्पोरेट सेक्टर में टेक्नोलॉजी के इस दबदबे ने कर्मचारियों के बीच एक अनजाना डर पैदा कर दिया है कि अगला नंबर किसका होगा?

​ चीनी अर्थव्यवस्था की 'कमजोर नस': 44% वर्कफोर्स अब गिग इकोनॉमी के भरोसे

​चीन में रियल एस्टेट और एजुकेशन जैसे बड़े सेक्टर पहले से ही मंदी की मार झेल रहे हैं। ऐसे में गुजारा करने के लिए लोग राइड-हेलिंग (कैब सर्विसेज) जैसे फ्लेक्सिबल कामों की ओर रुख कर रहे हैं।

​चौंकाने वाले आंकड़े:

एक प्रमुख थिंक-टैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में जहां फ्लेक्सिबल रोजगार (Gig Economy) से जुड़ने वालों की संख्या 16 करोड़ थी, वहीं इस साल इसके 32 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। यह चीन की कुल वर्कफोर्स का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा है।

​ 'साझा समृद्धि' की राह में AI बना सबसे बड़ा रोड़ा?

​जुलाई में शंघाई में आयोजित 'वर्ल्ड AI कॉन्फ्रेंस' में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा था कि AI को 'साझा समृद्धि' (Shared Prosperity) और सुरक्षा का जरिया बनना चाहिए।

​लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिस समय चीनी सरकार टेक्नोलॉजी के जरिए विकास का दावा कर रही है, ठीक उसी समय देश का लेबर मार्केट अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।