US Sanctions के बढ़ते दायरे ने अब भारतीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के बीच अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इस ताजा कार्रवाई में भारत स्थित चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों को सीधे तौर पर काली सूची में डाल दिया गया है।
वाशिंगटन द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम से भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग और वित्त मंत्रालय ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि ईरान के ऊर्जा क्षेत्र से लेन-देन करने वाले किसी भी विदेशी बिचौलिए या कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा।
ईरानी पेट्रोकेमिकल व्यापार पर US Sanctions का कड़ा प्रहार
अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कस्टम ब्रोकर फर्म पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी (Portease Partners LLP) पर ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कई शिपमेंट को भारत में आयात करवाने में मदद करने का आरोप लगा है। इसी आधार पर कंपनी और उसके दो प्रमुख भागीदारों—इंद्रिसमिया अशरफमिया शेख एवं हरीश रामचंद्र रंगी पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, जांच के दायरे में आई तीन अन्य भारतीय कंपनियों पर भी करोड़ों डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात का आरोप तय किया गया है:
सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड: इस कंपनी पर फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग 69 मिलियन डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पाद देश में लाने का आरोप है।
पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड: इस संस्थान पर जनवरी 2024 से जून 2025 के दौरान करीब 25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोकेमिकल आयात में संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। इसके निदेशक प्रशांत गर्ग पर भी व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाए गए हैं।
प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड: कंपनी पर मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 25 मिलियन डॉलर का प्रतिबंधित माल आयात करने का मामला दर्ज है।
इन सभी कंपनियों द्वारा किए गए आयात का कुल मूल्य लगभग 120 मिलियन डॉलर बैठता है।
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत US Sanctions का नया चरण
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हिस्सा है। इस आर्थिक अभियान का मुख्य उद्देश्य तेहरान की सभी वित्तीय लाइफलाइन को पूरी तरह से काटना है।
अमेरिका केवल तेल तक सीमित न रहकर ईरान के शिपिंग, बैंकिंग नेटवर्क, आधुनिक तकनीक, सोना, विमानन और डिजिटल एसेट्स को भी अलग-थलग कर रहा है। प्रतिबंधों के इस नए दौर में दुनिया भर की लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और तेल टैंकर जहाजों को चिन्हित किया गया है। वाशिंगटन ने दुनिया भर की लॉजिस्टिक्स, शिपिंग और फाइनेंशियल फर्मों को आगाह किया है कि ईरानी तंत्र से जुड़े किसी भी पक्ष को सहयोग देने पर सीधी कार्रवाई होगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था और चाबहार मार्ग पर US Sanctions का संभावित असर
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए ईरान से कच्चे तेल का सीधा आयात लगभग बंद कर दिया था। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच पारंपरिक व्यापारिक रिश्ते कायम हैं।
चाबहार बंदरगाह की प्रासंगिकता: भारत के लिए ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान को बाईपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच मार्ग प्रदान करता है।
पारंपरिक वस्तुओं का निर्यात: भारत से ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी और आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयों का बड़ा निर्यात होता है।
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